Sign in

Lost password?

0 Cart 0

No products in the cart.

Shopping cart (0)
Subtotal: ₹0.00

Checkout

Free shipping over 49$
Wishlist Please, enable Wishlist.
  • Home
  • Activity Books
  • New Books
    • Grown Ups
    • Kids
  • Story Books
    • 0 to 3 Years
    • 4 to 7 Years
    • 8 to 12 Years
    • 13 to 18 Years
    • 18+ Years
  • Board Books
  • Children Books
  • Encyclopedia
  • History Books
  • Phonics
  • Seasonal Books
  • Gift Pack
Home Story Books Page 140

Page 140

Return to previous page
Grid
List
Show

1 in stock

Sale
Zishe the Strongman
4 to 7 Years

Zishe the Strongman

₹399.00 Original price was: ₹399.00.₹95.00Current price is: ₹95.00.
At the age of 3, Zishe was lifting a nine-pound hammer in his father's blacksmith shop. By the age of eleven, there was not a bar he couldn't bend or a chain he could not snap. This is the unusual story of Zishe, a poor Polish Jew, who became the featured Strongman of circuses throughout the world. Based on the true story of Zishe of Lodz.
Add to cart

1 in stock

Sale
प्रतिज्ञा Pratigya
18+ Years

प्रतिज्ञा Pratigya

₹150.00 Original price was: ₹150.00.₹112.50Current price is: ₹112.50.
प्रेमचंद भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे मशहूर लेखकों में से एक हैं, और बीसवीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण हिन्दुस्तानी लेखकों में से एक के रूप में जाना जाता है। उनकी रचनाओं में एक दर्जन उपन्यास, लगभग 250 लघु कथाएँ, कई निबंध और अनेकों विदेशी साहित्यिक कृतियों का हिंदी में अनुवाद शामिल है। प्रेमचंद को पहला हिंदी लेखक माना जाता है जिनका लेखन प्रमुखता यथार्थवाद पर आधारित था। उनके उपन्यास गरीबों और शहरी मध्यम वर्ग की समस्याओं का वर्णन करते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों के बारे में जनता में जागरूकता लाने के लिए साहित्य का उपयोग किया और भ्रष्टाचार, बाल विधवापन, वेश्यावृत्ति, सामंती व्यवस्था, गरीबी, उपनिवेशवाद के लिए और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित विषयों के बारे में लिखा।प्रेमचंद ने 1900 के दशक के अंत में कानपुर में राजनीतिक मामलों में रुचि लेना शुरू किया था, और यह उनके शुरुआती काम में दिखाई देता है, जिनमें देशभक्ति का रंग था। शुरू में उनके राजनीतिक विचार मध्यम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नेता गोपाल कृष्ण गोखले से प्रभावित थे, पर बाद में, उनका झुकाव और अधिक कट्टरपंथी बाल गंगाधर तिलक की ओर हो गया। उन्होंने सख्त सरकारी सेंसरशिप के कारण, उन्होंने अपनी कुछ कहानियों में विशेषकर ब्रिटिश सरकार का उल्लेख नहीं किया, पर लेकिन मध्यकालीन युग और विदेशी इतिहास की सेटिंग में अपने विरोध को छिपा कर व्यक्त किया। 1920 में, वे महात्मा गाँधी के असहयोग आंदोलन और सामाजिक सुधार के लिए संघर्ष से प्रभावित थे। प्रेमचंद का ध्यान किसानों और मजदूर वर्ग के आर्थिक उदारीकरण पर केंद्रित था, और वे तेजी से औद्योगिकीकरण के विरोधी थे, जो उनके अनुसार किसानों के हितों के नुक्सान और श्रमिकों के आगे उत्पीड़न का कारण बन सकता था।
Add to cart

1 in stock

Sale
मनोरमा Manorama
8 to 12 Years

मनोरमा Manorama

₹75.00 Original price was: ₹75.00.₹74.25Current price is: ₹74.25.
मनोरमा: प्रेमचंद के इस गहरे सामाजिक उपन्यास में, रानी मनोरमा के जीवन के माध्यम से उस समय की नारी व्यथा को उजागर किया गया है। जानिए कैसे प्रेमचंद ने इन संघर्षों और दुःखों को संवेदनशीलता और गहराई के साथ व्यक्त किया। यह पुस्तक आपको उस युग में नारी जीवन के जटिल पहलुओं से परिचित कराती है। प्रेमचंद की अद्वितीय लेखनी ने एक बार फिर नारी व्यथा और समाजिक मुद्दों को उजागर करते हुए मनोरमा के पात्र में जीवन दिया है। इस उपन्यास के माध्यम से, प्रेमचंद ने एक अद्वितीय झलक प्रस्तुत की है जो उस समय की महिलाओं के सामाजिक और नैतिक संघर्षों को दर्शाती है। इस उपन्यास में व्यक्त किए गए गहरे विचार आपको उस समय की समाज की एक विस्तृत और सटीक झलक प्रदान करेंगे।
Add to cart

1 in stock

Sale
वरदान Vardaan
Grown Ups

वरदान Vardaan

₹150.00 Original price was: ₹150.00.₹112.51Current price is: ₹112.51.
वरदान' दो प्रेमियों की दुखांत कथा है। ऐसे दो प्रेमी जो बचपन में साथ- साथ खेले, जिन्होंने तरुणाई में भावी जीवन की सरल और कोमल कल्पनाएं संजोईं, जिनके सुन्दर घर के निर्माण के अपने सपने थे और भावी जीवन के निर्धारण के लिए अपनी विचारधारा थी। किन्तु उनकी कल्पनाओं का महल शीघ्र ढह गया। विश्व के महान कथा- शिल्पी प्रेमचन्द के उपन्यास वरदान में सुदामा अष्टभुजा देवी से एक ऐसे सपूत का वरदान मांगती है, जो जाति की भलाई में संलग्न हो। इसी ताने-बाने पर प्रेमचन्द की सशक्त कलम से बुना कथानक जीवन की स्थितियों की बारीकी से पड़ताल करता है। सुदामा का पुत्र प्रताप एक ऐसा पात्र है जो दीन-दुखियों, रोगियों, दलितों की निस्वार्थ सहायता करता है। इसमें विरजन और प्रताप की प्रेम-कथा भी है, और है विरजन तथा कमलाचरण के अनमेल विवाह का मार्मिक प्रसंग। इसी तरह एक माधवी है, जो प्रताप के प्रति भाव से भर उठती है, लेकिन अंत में वह सन्यासी जो मोहपाश में बांधने की जगह स्वयं योगिनी बनना पसंद करती हैं।
Add to cart

1 in stock

Sale
सेवासदन SevaSadan
Grown Ups

सेवासदन SevaSadan

₹195.00 Original price was: ₹195.00.₹150.00Current price is: ₹150.00.
प्रेमचंद ने सामाजिक सरोकारों से ओत-प्रोत उपन्यास 'सेवासदन' की रचना आज से करीब सौ साल पहले 1918 में की थी। उर्दू भाषा में यही उपन्यास 'बाजार-ए- हुस्न' के नाम से 1919 में छपा। 'सेवासदन' में प्रेमचंद ने नारी पराधीनता, वेश्या जीवन, दहेज प्रथा और मध्यम वर्ग की आर्थिक सामाजिक समस्याओं को प्रमुखता के साथ चित्रित करके उसका यथासंभव समाधान भी प्रस्तुत किया है। ईमानदार थानेदार कृष्णचंद्र की दो बेटियां सुमन और शांता हैं। दहेज की शर्त पूरी किए बिना कोई भी अच्छा रिश्ता सुमन के लिए मिल नहीं पाता। "सेवासदन की मुख्य समस्या भारतीय नारी की पराधीनता है। नारी-समाज का सबसे दलित अंग राष्ट्रीय पराधीनता और घरेलु दासता, दोनों से पिसती हुई नारी-स्वाधीनता के लिए हाथ फैलाने लगी थी। प्रेमचंद ने सबसे पहले इस परिवर्तन को देखा था, उसका स्वागत किया और उसे बढ़ावा दिया।" 'सेवासदन' के माध्यम से प्रेमचंद केवल सामाजिक कुरीतियों और आडंबरों से ही रूबरू नहीं करते, बल्कि यथायोग्य तात्कालिक समाधान भी प्रस्तुत करते हैं।
Add to cart
  • prev
  • 1
  • …
  • 139
  • 140

Categories

  • Activity Books
  • Board Books
  • Children’s Book
  • Encyclopedia
  • Gift Pack
  • History
  • New Books
    • Grown Ups
    • kids
  • Phonics
  • Seasonal Books
  • Story Books
    • 0 to 3 Years
    • 13 to 18 Years
    • 18+ Years
    • 4 to 7 Years
    • 8 to 12 Years
© Created by  8theme - Power Elite ThemeForest Author.